त्यौहार
मो० सनी०
फ़िरोज़ाबाद,। दीपावली पर्व नजदीक है और पूरे देश में चीनी सामान का पूर्ण का बहिष्कार करने के बावजूद भी दुकानों में सजे हुए हैं चाइना में बने बिजली के उपकरण।
एक बार फिर दीपावली को “मेड इन चाइना” वाली दिवाली बनाने के लिए भारतीय बाजारों में तैयार की जा रही है सामग्री। बाजारों में धड़ल्ले से बिक रही हैं चाइना की झालर है और लाईटें।

 

बाजार में चीनी सामान बेच रहे दुकानदारों का यह मानना है कि वे इन चाइनीस सामानों को ना बेचें मगर लोगों द्वारा उसकी मांग किए जाने पर उनकी मजबूरी है कि वह इन सामानों को अपने ग्राहकों को दें।
मगर फिर यदि दुकानदार बेचने से और ग्राहक खरीदने से नहीं हिचकते तो फिर यह कैसा बहिष्कार? इस प्रकार तो यह मुहिम मात्र एक छलावा ही प्रतीत होती है।
जो मात्र राजनीतिक हितों को साधने के लिए जनता के सामने धरनों वाली सियासत का रचा गया एक ढोंग है। इसके अलावा बेहद चौंकाने वाला सच यह है कि देश की जो जनता एक तरफ राष्ट्रवादी होने का दावा करती है और
भारतीय व्यवसाय को बढ़ावा देने की बात करती है वहीं दिवाली के मौके पर चाइनीस झालर है और बिजली के सामान खरीदने से बिल्कुल भी नहीं हिचके जाती तो यह किस प्रकार की राष्ट्रवादीता हुई?
अगर साफ तौर देखा जाएं और दुकानदारों की माने तो अभी भी कहीं ना कहीं इंडियन झालरों से ज्यादा चाइना के बने उपकरणों को ज्यादा अहमियत दी जा रही है…
इससे साफ जाहिर होता है। कि जो पूरे देश में चाइना के आइटमो का बहिष्कार की मुहिम छेड़ी गई थी वो कहीं ना कहीं विफल होती नजर आ रही है।
अब ऐसे में हमें जरूरत है कि हम सभी साथ मिलकर बहिष्कार वाली नीति को अपनाऐं तभी यह आंदोलन जन आंदोलन बनकर खड़ा हो सकेगा।
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