अब नहीं
किसी भी यूजर की फिजिकली पहचान करना कंपनियों का काफी महंगा पड़ सकता है। साथ ही इसमें समय भी ज्यादा लगता है। टेलिकॉम डिपार्टमेंट ने नोटिस जारी कर कहा है कि टेलिकॉम कंपनियां अब से कस्टमर ऐक्विजिशन फॉर्म (CAF) के जरिए वेरिफिकेशन करेंगी।
इसमें यूजर की एक लाइव फोटो होगा। साथ ही उसके एड्रेस प्रूफ की स्कैन इमेज भी लगानी होगी। डिपार्टमेंट ने इस आदेश को पूरी तरह से लागू करने के लिए कंपनियों को 5 नवंबर तक का समय दिया है।
यही नहीं, कंपनियों को यह भी बताना होगा कि वो यूजर की वेरिफिकेशन कैसे कर रहे हैं। ऐसा करने के बाद ही उसे अप्रूव किया जाएगा।
सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में टेलिकॉम डिपार्टमेंट को आदेश दिया था कि अब से कोई भी टेलिकॉम कंपनी आधार बेस्ट डिजिटल पहचान नहीं ले सकती हैं। इस आदेश के चलते रिलायंस जियो, भारती एयरटेल और वोडाफोन आइडिया जैसे कंपनियों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
इस आदेश के बाद अब एक और आदेश दे दिया गया है जिसके तहत कंपनियों को अब यूजर्स की फिजिकल पहचान करनी होगी। टेलिकॉम डिपार्टमेंट ने कंपनियों से कहा है कि
जब तक आधार के अलावा कोई और व्यवस्था नहीं होती है तब तक उन्हें यूजर्स की फिजिकल पहचान ही करनी होगी।
खबरों की मानें तो सुप्रीम कोर्ट और टेलिकॉम डिपार्टमेंट की तरफ से ईकेवाईसी पर रोक लगाए जाने के बाद से सबसे ज्यादा नुकसान रिलायंस जियो को होगा।
क्योंकि कंपनी ग्राहकों को नए कनेक्शन आधार बेस्ट वेरिफिकेशन पर ही दे रहा थी। ऐसे में इन आदेशों के बाद जियो के यूजर्स की संख्या जो लगातार बढ़ रही थी उसमें कुछ कमी आने की संभावना है।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद सरकार ने टेलिकॉम कंपनियों को मौजूदा ग्राहक और नए ग्राहक को कनेक्शन देने के लिए आधार ई-केवाईसी सत्यापन बंद करने को कहा था।
इस आदेश का पालने करने के लिए टेलिकॉम डिपार्टमेंट ने टेलिकॉम कंपनियों के लिए दिशानिर्देश जारी किया था।
इसमें कहा गया था कि मौजूदा ग्राहकों के साथ नई सिम देने के लिए कंपनियां आधार ई-केवाईसी का इस्तेमाल नहीं कर सकती हैं। डिपार्टमेंट ने यह भी कहा था कि
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अगर ग्राहक किसी दस्तावेज के तौर पर अपनी इच्छा से आधार देता है तो उसे केवल ऑफलाइन ही इस्तेमाल किया जा सकता है।

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