चुनाव आयोग
गुरुवार (25 अक्टूबर) को दिल्ली की सत्ताधारी पार्टी आम आदमी पार्टी (आप) को चुनाव आयोग ने बड़ी राहत दी है। आयोग ने उस याचिका को खारिज कर दिया है जिसमें आप के 27 विधायकों की सदस्यता लाभ के पद मामले में खारिज करने का अनुरोध किया गया था। बता दें कि यह मामला दिल्ली रोगी कल्याण समिति से जुड़ा है।
कानून के छात्र विभोर आनंद ने साल 2016 में दिल्ली सरकार के इस कदम को लाभ का पद मानते हुए चुनाव आयोग और राष्ट्रपति से कार्रवाई करते हुए 27 विधायकों की सदस्यता रद्द करने का अनुरोध किया था।
दो साल बाद आयोग ने मामले की सुनवाई करते हुए याचिका को खारिज कर दिया। इससे आप के 27 विधायकों ने राहत की सांस ली है।
बता दें कि इसी साल जनवरी में चुनाव आयोग की सिफारिश पर राष्ट्रपति ने विधायकों को संसदीय सचिव बनाए जाने से जुड़े दूसरे लाभ का पद मामले में आप के 21 विधायकों की सदस्यता रद्द कर दी थी। हालांकि, बाद में हाईकोर्ट ने उस पर रोक लगा दी।
आप सरकार ने दिल्ली के हरेक अस्पताल में एक रोगी कल्याण समिति बनाई थी जिसके अध्यक्ष आप के विधायकों को बनाया था। इस तरह 27 विधायकों को रोगी कल्याण समिति का अध्यक्ष नियुक्त किया गया था।
दिल्ली सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग द्वारा 26 अप्रैल को जारी किए गए एक आदेश के मुताबिक रोगी कल्याण समितियां परामर्श देने का काम करती हैं जिससे स्वास्थ्य सुविधाओं, रणनीतियां बनाने आदि में मदद मिलेगी।
इसमें कहा गया है कि हर ‘एसेंबली रोगी कल्याण समिति’ को अनुदान के तौर पर सालाना तीन लाख रुपये मुहैया कराए जाएंगे।
चुनाव आयोग ने राष्ट्रपति द्वारा भेजी गई याचिका पर यह फैसला लिया है। आयोग के एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने बृहस्पतिवार को कहा कि राष्ट्रपति ने चुनाव आयोग की राय के आधार पर याचिका खारिज करने के आदेश पर हस्ताक्षर किये।
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चुनाव आयोग ने याचिका को विचारयोग्य नहीं पाया था। इस तरह की याचिकाएं राष्ट्रपति के पास भेजी जाती हैं जो उन्हें चुनाव आयोग के पास भेज देते हैं।
इसके बाद आयोग अपनी राय देता है जिसके आधार पर राष्ट्रपति आदेश जारी करते हैं।

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