CBI विवाद
केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) में मचे उथल-पुथल को लेकर पहली बार सरकार की तरफ से टिप्पणी आई है। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा है कि सीबीआई में विचित्र और दुभार्ग्यपूर्ण स्थिति पैदा हुई है। डायरेक्टर और स्पेशल डायरेक्टर पर आरोप लगे हैं।
पर इनकी जांच सरकार नहीं कर सकती। केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) के पास जांच का अधिकार है। वित्त मंत्री ने आगे साफ किया कि दोनों अधिकारी फिलहाल छुट्टी पर हैं,
जिन पर सीवीसी की सिफारिश से ही कार्रवाई की जा सकती है।
जेटली ने ये बातें बुधवार (24 अक्टूबर) को कैबिनेट की बैठक के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहीं। वह बोले, “सीबीआई प्रतिष्ठित जांच एजेंसी है और इसकी गरिमा बरकरार रखने के लिए मामले की सही जांच होना जरूरी है।
डायरेक्टर पर स्पेशल डायरेक्टर ने आरोप लगाए हैं, जबकि स्पेशल डायरेक्टर पर सीबीआई ने मामला दर्ज किया था। सीबीआई के शीर्ष अफसरों पर गंभीर आरोप लगे हैं।
अब इसकी जांच कौन करेगा? और उस दौरान निष्पक्षता जरूरी होगी। पर सरकार इस मामले की जांच नहीं कर सकती है।”

बकौल वित्त मंत्री, “सीवीसी ने कल अपनी बैठक में साफ किया था कि ये दो अफसर (आलोक वर्मा और राकेश अस्थाना) और न ही उनके अंतर्गत आने वाले कोई एजेंसी उन पर लगे आरोपों की जांच नहीं कर सकते।
ऐसे में वे छुट्टी पर रहेंगे।” हालांकि, उन्होंने आगे यह भी कहा कि दोनों अफसर निर्दोष होने पर वापस काम पर लौटेंगे। उन्होंने आगे बोले, “सीवीसी की सिफारिशों और सरकार के फैसले के जरिए संस्था की गरिमा और साख बरकरार रखी जाएगी।”
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कॉन्फ्रेंस में उन्होंने विपक्ष के आरोपों और बयानों पर भी टिप्पणी की। विपक्षी दलों के आरोप पूर्ण रूप से बकवास करार देते हुए वित्त मंत्री ने कहा,
“विपक्ष को मालूम भी है कि सीबीआई में हो क्या रहा है?” आपको बता दें कि विपक्षी दलों ने सीबीआई में मचे उथल-पुथल को लेकर मोदी सरकार पर निशाना साधा था।
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कांग्रेस ने कहा था कि पीएम मोदी ने सीबीआई की आजादी में आखिरी कील ठोंक कर उसे दफन कर दिया, जबकि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) सुप्रीमो ममता बनर्जी बोलीं कि सीबीआई अब बीबीबाई बन चुकी है।

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